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हिन्दू धर्म के 18 पुराण

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हिन्दू धर्म के 18 पुराण , अठारह पुराण की जानकारी नमस्कार मित्रों आज का यह लेख हिन्दू धर्म के अठारह पुराणों पर आधारित है, क्योंकि इसमें हमने आपकी सुविधा के लिए पुराणों से संबंधित विषय को चुना है । यहाँ पर आपको सभी पुराणों की PDF FILE प्राप्त हो जाएगी जिसे आप DOWNLOAD करके  पढ़ भी सकते हैं अगर आप इन पुराणों को खरीदना चाहते हैं तो आप दिए गए BUY NOW पर क्लिक करके आसानी से खरीद सकते हैं। 1 ब्रह्म पुराण –   ब्रह्म पुराण सब से प्राचीन है। इस पुराण में  10000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा की महानता के अतिरिक्त सृष्टि की उत्पत्ति, गंगा आवतरण तथा रामायण और कृष्णावतार की कथायें भी संकलित हैं। इस ग्रंथ से सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर सिन्धु घाटी सभ्यता तक की कुछ ना कुछ जानकारी प्राप्त की जा सकती है।   2 पद्म पुराण –   पद्म पुराण में 55000 श्र्लोक हैं और यह ग्रंथ पाँच खण्डों में विभाजित है जिन के नाम सृष्टिखण्ड, स्वर्गखण्ड, उत्तरखण्ड, भूमिखण्ड तथा पातालखण्ड हैं। इस ग्रंथ में पृथ्वी आकाश, तथा नक्षत्रों की उत्पति के बारे में उल्लेख किया गया है। चार प्रकार से जीवों की उत्पत्ति होती है जिन्हें

चार महीने बाद गूंजेंगी शहनाई22 अप्रैल से शुरू होंगे विवाह

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ज्योतिष:2021में  22 अप्रैल से शुरू होंगी शादियां 2021 में शादी के लिए 51 दिन रहेंगे शुभ मुहूर्त इस साल शादियों के लिए करीब 49 मुहूर्त थे। लेकिन कोरोना के चलते 26 दिन ही विवाह हो पाए। 2020 का आखिरी विवाह मुहूर्त 11 दिसंबर को है। इसके बाद 16 से धनुर्मास शुरू हो जाएगा। जिससे 15 जनवरी तक विवाह और अन्य मांगलिक काम नहीं हो पाएंगे। इसके बाद 2021 में शादी का पहला मुहूर्त 18 जनवरी को रहेगा। फिर सीधे 3 महीने बाद 22 अप्रैल से शादियां शुरू होंगी।।          देवउठनी एकादशी के बाद 7 मुहूर्त में 11 दिसंबर आखिरी देवउठनी एकादशी के बाद 11 दिसंबर तक कुल 7 ही दिन शादी के मुहूर्त हैं। इसमें आखिरी मुहूर्त 11 यानी आज है। इससे पहले 2020 में जनवरी से मार्च तक होली से पहले 19 दिन ही मुहूर्त थे। फिर 15 मार्च से मल मास शुरू हो गया, इसके बाद कोरोना के चलते लॉक डाउन में अप्रैल से जून तक 23 मुहूर्त निकल गए। फिर चातुर्मास के दौरान जुलाई से 24 नवंबर तक शादियां नहीं हो पाई।।                  2021 में सिर्फ 51 मुहूर्त 2021 में शादियों के लिए सिर्फ 51 दिन रहेंगे। 18 जनवरी को पहला मुहूर्त रहेगा। इसके बाद बृहस्पति और शुक्र

देवउठनी एकादशी 25 को:इस साल विवाह के 7 और 2021 में 51 मुहूर्त,

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देवउठनी एकादशी 25 को:इस साल विवाह के 7 और 2021 में 51 मुहूर्त, लेकिन जनवरी से मार्च तक केवल एक ही मुहूर्त   इस साल विवाह के 7 और 2021 में 51 मुहूर्त, लेकिन जनवरी से मार्च तक केवल एक ही मुहूर्त|ज्योतिष  इस साल नवंबर में सिर्फ 2 ही विवाह मुहूर्त, मई 2021 में सबसे ज्यादा 15 दिन शादियां हो सकेंगी देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन से विवाह और दूसरे मांगलिक कामों का सिलसिला शुरू हो जाता है। लोक परंपरा में इस एकादशी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए इस दिन हर तरह के शुभ काम हो सकते हैं। काशी के ज्योतिष पं. पवन देव शर्मा के मुताबिक, नवंबर में विवाह के लिए देवउठनी एकादशी को मिलाकर सिर्फ दो ही दिन मुहूर्त है। वहीं, दिसंबर में विवाह के लिए 5 मुहूर्त रहेंगे। 11 दिसंबर साल का आखिरी मुहूर्त होगा। वहीं, अगले साल भी विवाह की धूम आधा अप्रैल गुजरने के बाद ही होगी, क्योंकि जनवरी से मार्च 2021 तक विवाह का सिर्फ एक ही मुहूर्त है, वो 18 जनवरी को है। उसके बाद सीधे 22 अप्रैल से शुभ दिन शुरू होंगे। तुलसी विवाह वाला दिन शुभ देव प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी शालिग्राम विवाह की परंपरा है, इसलिए इस दिन क

शुभ और सौभाग्य के लिए करे शुभ मुहूर्त में ख़रीदारी*

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**शुभ और सौभाग्य के लिए करे शुभ मुहूर्त में ख़रीदारी*        नवंबर महीने में  ख़रीदारी के लिए शुभ मुहूर्त 4 नवंबर से शुरू हो रहे है। इस दौरान दीपावली तक ज्वैलरी वाहन इलेक्ट्रॉनिक समान सहित घर के सभी जरूरी चीजो की खरीदारी की जा सकती है। काशी के ज्योतिष पवन देव शर्मा  ने बताया कि नवंबर के पहले हफ्ते और दूसरे हफ्ते में अष्टमी धनतेरस और दीपावली सहित चार शुभ मुहूर्त रहेगे। 4 से 14नवंबर तक 3 सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग के साथ ही वर्धमान मातंग  महालक्ष्मी पुष्य योग बनेगे। इन शुभ  योगों में की गई खरीदारी में सुख सम्रद्धि और प्रसन्नता मिलती है। ज्योतिष पवन देव शर्मा ने बताया कि इस बार सात तारीख को पुष्य योग और 12 तारीख को धनतेरस पर्व मनाया जाएगा वही 14 नवंबर शनिवार को महालक्ष्मी पूजा के साथ दीपावली मनाया जाएगा।.        *4 नवंबर को सूर्योदय काल से* ही सर्वार्थ सिद्धि योग जो अगले दिन तक रहेगा इस दिन करवाचैथ पर्व रहेगा। चतुर्थी और बुधवार होने से इस दिन की शुभता बढ़ जाएगी नए व्यपारिक सौदे किये  जा सकते है।                 5नवंबर गुरुवार को पूर्णा तिथि के योग में की गई खरीदारी समृद्धि देने वाली होगी

21अगस्त को हरितालिका व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला व्रत है 'हरितालिका तीज' व्रत

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सुहागिनों के अखण्ड सौभाग्य का रक्षक - हरितालिका व्रत (तीज) पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला व्रत 'हरितालिका तीज' 21 अगस्त को है।  '    के अनुसार भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका का व्रत किया जाता है। इस बार यह व्रत उ.फा.नक्षत्र तथा सिद्ध योग में मानया जायेगा।  है। विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं और अविवाहित लड़कियां अच्छे वर की कामना के लिए भी इस व्रत को रखती है। जिस त्याग-तपस्या और निष्ठा के साथ स्त्रियाँ यह व्रत रखती हैं, वह बड़ा ही कठिन है। इसमें फलाहार- सेवन की बात तो दूर रही, निष्ठावाली स्त्रियाँ जलतक ग्रहण नही करतीं।   तृतीया तिथि गुरुवार20अगस्त को रात्रि  2: 14बजे से लग जाएगी जो शुक्रवार 21अगस्त  के रात्रि में 11 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जायेगी।  चतुर्थी से युक्त तृतीया(हरितालिका) वैधव्यदोष नाशक तथा पुत्र-पौत्रादि को बढ़ाने वाली होती है। इसीलिए इस वर्ष हरितालिका व्रत शुक्रवार  21अगस्त को मनाया जायेगा।  हरितालिका तीज का मुहूर्त शाम 7:10 बजे से रात 09:15 बजे तक है।    'शास्त्र में इस व्रत के लिए सधवा, वि

अष्टचिरंजीवी कौन-कौन हैं?:कहानी उन लोगों की जो हमेशा जीवित रहेंगे, कोई वरदान तो कोई शाप के कारण कभी मरेगा नहीं, ग्रंथों में हैं 8 ऐसे पात्र जो अमर हैं

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अष्टचिरंजीवी कौन-कौन हैं?:कहानी उन लोगों की जो हमेशा जीवित रहेंगे, कोई वरदान तो कोई शाप के कारण कभी मरेगा नहीं, ग्रंथों में हैं 8 ऐसे पात्र जो अमर हैं हनुमानजी को माता सीता ने दिया था अजर-अमर होने का वरदान, रावण के भाई विभीषण भी हैं अष्टचिरंजीवियों में शामिल अष्टचिरंजीवी यानी 8 पात्र जो हमेशा जीवित रहेंगे और इन्हें कभी बुढ़ापे का सामना नहीं करना पड़ेगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा ने बताया कि रोज सुबह अष्टचिरंजीवियों के नाम का जाप करने की परंपरा है। इस संबंध में मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों को लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन मिलता है। ये है अष्टचिरंजीवियों से संबंधित श्लोक अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषण:। कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥ सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।। इस श्लोक की शुरू की दो पंक्तियों का अर्थ यह है कि अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम ये सात चिरंजीवी हैं। इसके बाद अगली पंक्तियों का अर्थ यह है कि इन सात के साथ ही मार्कडेंय ऋषि के नाम का जाप करने से व्यक्ति निरोगी रहता है

16 अगस्त को मेष राशि में प्रवेश करेगा ग्रहो के सेनापति मंगल; इससे देश में कई विरोध, उपद्रव और हिंसा बढ़ सकती है, बड़ी हस्ती के निधन की भी आशंका है

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16 अगस्त को मेष राशि में प्रवेश करेगा ग्रहो के सेनापति मंगल; इससे देश में कई विरोध, उपद्रव और हिंसा बढ़ सकती है, बड़ी हस्ती के निधन की भी आशंका है Add caption

इन 6 उपायों को अपनाने से दूर हो सकते हैं कुंडली के ग्रह दोष

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इन 6 उपायों को अपनाने से दूर हो सकते हैं कुंडली के ग्रह दोष आपकी कुंडली में अगर ग्रह दोष है तो आपकी परेशानियां बढ़ सकती हैं. ग्रह दोष को खत्म करने के लिए कुछ उपाए किए जाते हैं. हालांकि ग्रह दोषों को खत्म करने के लिए कुंडली का अध्ययन करना जरूरी होता है. लेकिन कुछ उपाय बिना कुंडली देखे ही किए जा सकते हैं (1)हर महीने की पूर्णिमा की रात को चंद्रदेव को जल चढ़ाने से कुंडली में चंद्रमा के दोष दूर हो जाता है. (2)महीने में अमावस्या तिथि की पर पीपल की पूजा करें. इस उपाय से कुंडली में मौजूद शनि, राहु-केतु के दोष दूर होते हैं. (3)जल और दूध को पीतल के पात्र में मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाने से कुंडली दोष समाप्त होते हैं. (4)मंगलवार के दिन मसूर की दाल का दान करने से कुंडली से मंगल दोष खत्म होते हैं. मंगल दोष दूर होने पर व्यक्ति के भूमि और मकान से जुड़ी हुई परेशानियां समाप्त हो जाती हैं. (5)अगर कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित दोष है तो हर बुधवार को गणेशजी को दूर्वा घास अर्पित करें. (6)अगर कुंडली मं गुरु ग्रह से संबंधित दोष है तो हर गुरुवार को भगवान विष्णु को केले  का भोग लगाए पवन देव शर्मा ज्योतिष अध्ययनरत