21अगस्त को हरितालिका व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला व्रत है 'हरितालिका तीज' व्रत

सुहागिनों के अखण्ड सौभाग्य का रक्षक - हरितालिका व्रत (तीज)

पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला व्रत 'हरितालिका तीज' 21 अगस्त को है। 
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के अनुसार भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका का व्रत किया जाता है। इस बार यह व्रत उ.फा.नक्षत्र तथा सिद्ध योग में मानया जायेगा।
 है। विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं और अविवाहित लड़कियां अच्छे वर की कामना के लिए भी इस व्रत को रखती है। जिस त्याग-तपस्या और निष्ठा के साथ स्त्रियाँ यह व्रत रखती हैं, वह बड़ा ही कठिन है। इसमें फलाहार- सेवन की बात तो दूर रही, निष्ठावाली स्त्रियाँ जलतक ग्रहण नही करतीं। 

 तृतीया तिथि गुरुवार20अगस्त को रात्रि  2: 14बजे से लग जाएगी जो शुक्रवार 21अगस्त  के रात्रि में 11 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जायेगी। 
चतुर्थी से युक्त तृतीया(हरितालिका) वैधव्यदोष नाशक तथा पुत्र-पौत्रादि को बढ़ाने वाली होती है। इसीलिए इस वर्ष हरितालिका व्रत शुक्रवार 
21अगस्त को मनाया जायेगा।
 हरितालिका तीज का मुहूर्त शाम 7:10 बजे से रात 09:15 बजे तक है।
 

 'शास्त्र में इस व्रत के लिए सधवा, विधवा सबको आज्ञा है। धर्मप्राणा स्त्रियों को चाहिए कि वे
" मम उमामहेश्वरसायुज्यसिद्धये हरितालिकाव्रतमहं करिष्ये'। 

यह संकल्प करके मकान को मंडप आदि से सुशोभित कर पूजन सामग्री एकत्र करें। इसके बाद कलश स्थापन करके उस पर सुवर्णादि निर्मित शिव गौरी (अथवा पूर्व प्रतिष्ठित हर-गौरी) के समीप बैठकर उनका सहस्त्रशीर्षा. आदि  मंत्रों से पुष्पार्पणपर्यन्त पूजन करके 'ऊँ उमायै नम:,से उमा के और महादेवाय नम:  से महेश्वर के नामों से स्थापन और पूजन करके धूप दीपादि से षोडशोपचार   संपन्न  करें और
 
'देवि देवि उमे गौरि त्राहि मां करुणानिधे।
ममापराधा: क्षन्तव्या भुक्तिमुक्तिप्रदा भव।।

 से प्रार्थना करें और निराहार रहे। दूसरे दिन पूर्वाह्न में पारण करके व्रत को समाप्त करें।  इसी दिन 'हरिकाली' 'हस्तगौरी' और 'कोटीश्वरी'  आदि के व्रत भी होते हैं। इन सब में पार्वती के पूजन का प्रधान्य  है और विशेषकर इनको स्त्रियां करती हैं।
पवन देव शर्मा ज्योतिष  )ज्योतिष विभाग)अध्ययनरत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी(उत्तर प्रदेश)

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