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Top 5 Kundli software

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Top 5 Kundli software Top 5 Kundli software आज हम आपको Top 5 कुंडली Software के बारे में बताने वाले हैं  जिनको आप दिए गए लिंक पर जाकर Download कर सकते हैं ये सभी Android mobile के लिए ही  available हैं। हमने इस सूची में सबसे बढ़िया Kundali making software को ही चुना है जो कि प्रयोग करने में बहुत ज्यादा आसान है। Num 1 – Astrology S Horoscope Download now Num 2–Hindu calendar Download now Num 3 –Astrosage kundali Download now Num 4 – Kundali Download now Num 5 – Kundali in hindi Download now दिए गए किसी भी mobile apps  को आप google play store  से डाऊनलोड कर सकते हैं ज्योतिष के बारे में विस्तृत जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें Click here अगर आप इस जानकारी से प्रसन्न हैं तो अवश्य बताएं आपका शुभ चिंतक नीरज उपाध्याय Top 5 Kundli software

चरणामृत का महत्व | charanamrit ka mahatv

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चरणामृत का महत्व अक्सर जब हम मंदिर जाते है तो पंडित जी हमें भगवान का चरणामृत देते है,क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश की कि चरणामृतका क्या महत्व है, शास्त्रों में कहा गया है। श्लोक ― अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्। विष्णो: पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते ।। अर्थात भगवान विष्णु के चरण का अमृत रूपी जल समस्त पाप -व्याधियों का शमन करने वाला है तथा औषधी के समान है। जो चरणामृत पीता है उसका पुनः जन्म नहीं होता" जल तब तक जल ही रहता है जब तक भगवान के चरणों से नहीं लगता, जैसे ही भगवान के चरणों से लगा तो अमृत रूप हो गया और चरणामृत बन जाता है। चरणामृत संबंधित एक कथा। जब भगवान का वामन अवतार हुआ, और वे राजा बलि की यज्ञ शाला में दान लेने गए तब उन्होंने तीन पग में तीन लोक नाप लिए जब उन्होंने पहले पग में नीचे के लोक नाप लिए और दूसरे में ऊपर के लोक नापने लगे तो जैसे ही ब्रह्म लोक में उनका चरण गया तो ब्रह्मा जी ने अपने कमंडलु में से जल लेकर भगवान के चरण धोए और फिर चरणामृत को वापस अपने कमंडल में रख लिया,वह चरणामृत गंगा जी बन गई, जो आज भी सारी दुनिया के पापों को धोती है, ये शक्ति उनके पास कहाँ से

ज्योतिष एक विज्ञान

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ज्योतिष क्या है ज्योतिष सिर्फ और सिर्फ एक विज्ञान है जिससे ग्रहों की ऊर्जा का आपके शरीर मन और आत्मा पर प्रभाव को देखा जाता है ज्योतिष को समझने के लिए पहले हमें ग्रहों को समझना होता है ग्रहों में सबसे पहले इनकी गति को पकड़ना होता है ग्रह तो घूम रहे है और यह घूमते रहते है इसलिए सबसे जरूरी यही होता है कि ग्रहों की गति को समझा जाए उसके बाद इनकी चाल होती है कितनी रफ्तार है ग्रहों में इनकी स्पीड का आकलन करना जरूरी होती है जब ग्रह में गति होगी तभी तो वो कुछ काम कर पाएगा जब भी ग्रह मार्गी से वक्री होता है या वक्री से मार्गी वो कुछ पल के लिए रुक जाता है ना वो आगे की तरफ चलता है न पीछे की तरफ उस वक़्त ग्रह की कोई गति नही होती यह ऐसे ही है जैसे आप आगे चल रहे है जब आप पीछे की तरफ मुड़ते है तो एक पल के लिए रुक जाते है ऐसे में किसी का जन्म हो और ग्रह में गति न हो वो ग्रह अपना फल नही दे पाता है ज्योतिष की प्रमुख पुस्तकें यहाँ से खरीदे भारतीय ज्योतिष   लेखक– नेमिचन्द्र शास्त्री जातक पारिजात लेखक– कपिलेश्वर शास्त्री मित्रो आप ज्योतिष को एक विज्ञान समझो इनके बारे में पडो पहले सूर्य चंद्

चतु:श्लोकी भागवत

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                  चतु:श्लोकी भागवत अगर आपके पास इतना समय नहीं है कि पूरी भागवत का पाठ कर सकें और आप करना चाहते हैं। परेशान मत होइये ये चार ऐसे श्लोक हैं जिनमें संपूर्ण भागवत-तत्व का उपदेश समाहित है। यही मूल चतु:श्लोकी भागवत है। पुराणों के मुताबिक, ब्रह्माजी द्वारा भगवान नारायण की स्तुति किए जाने पर प्रभु ने उन्हें सम्पूर्ण भागवत-तत्त्व का उपदेश केवल चार श्लोकों में दिया था। आइये जानते हैं कौन हैं वे चार श्लोक, जिनके पाठ से पूरी भागवत पाठ का फल मिलेगा।  🚩 *श्लोक* 1 अहमेवासमेवाग्रे नान्यद यत् सदसत परम। पश्चादहं यदेतच्च योSवशिष्येत सोSस्म्यहम अर्थ- सृष्टि से पूर्व केवल मैं ही था। सत्, असत या उससे परे मुझसे भिन्न कुछ नहीं था। सृष्टी न रहने पर (प्रलयकाल में) भी मैं ही रहता हूं। यह सब सृष्टीरूप भी मैं ही हूँ और जो कुछ इस सृष्टी, स्थिति तथा प्रलय से बचा रहता है, वह भी मैं ही हूं।  🚩*श्लोक* -2 ऋतेSर्थं यत् प्रतीयेत न प्रतीयेत चात्मनि। तद्विद्यादात्मनो माया यथाSSभासो यथा तम: अर्थ- जो मुझ मूल तत्त्व को छोड़कर प्रतीत होता है और आत्मा में प्रतीत नहीं होता, उसे आत्मा की माया समझो।