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रुद्राभिषेक का महत्त्व तथा लाभ

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रुद्राभिषेक का महत्त्व तथा लाभ  भगवान शिव के रुद्राभिषेक से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है साथ ही ग्रह जनित दोषों और रोगों से शीघ्र ही मुक्ति मिल जाती है।  रूद्रहृदयोपनिषद अनुसार शिव हैं – सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका: अर्थात् सभी देवताओं की आत्मा में रूद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रूद्र की आत्मा हैं। भगवान शंकर सर्व कल्याणकारी देव के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी पूजा,अराधना समस्त मनोरथ को पूर्ण करती है। हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण होती हैं। भगवान शिव को शुक्लयजुर्वेद अत्यन्त प्रिय है कहा भी गया है वेदः शिवः शिवो वेदः। इसी कारण ऋषियों ने शुकलयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी से रुद्राभिषेक करने का विधान शास्त्रों में बतलाया गया है यथा – यजुर्मयो हृदयं देवो यजुर्भिः शत्रुद्रियैः। पूजनीयो महारुद्रो सन्ततिश्रेयमिच्छता।। शुकलयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी में बताये गये विधि से रुद्राभिषेक करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है ।जाबालोपनिषद में याज्ञवल्क्य ने कहा – शतरुद्रियेणेति अर्थात शतरुद्रिय के सतत पाठ करने से मोक्ष की प्

Top 5 Kundli software

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Top 5 Kundli software Top 5 Kundli software आज हम आपको Top 5 कुंडली Software के बारे में बताने वाले हैं  जिनको आप दिए गए लिंक पर जाकर Download कर सकते हैं ये सभी Android mobile के लिए ही  available हैं। हमने इस सूची में सबसे बढ़िया Kundali making software को ही चुना है जो कि प्रयोग करने में बहुत ज्यादा आसान है। Num 1 – Astrology S Horoscope Download now Num 2–Hindu calendar Download now Num 3 –Astrosage kundali Download now Num 4 – Kundali Download now Num 5 – Kundali in hindi Download now दिए गए किसी भी mobile apps  को आप google play store  से डाऊनलोड कर सकते हैं ज्योतिष के बारे में विस्तृत जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें Click here अगर आप इस जानकारी से प्रसन्न हैं तो अवश्य बताएं आपका शुभ चिंतक नीरज उपाध्याय Top 5 Kundli software

चरणामृत का महत्व | charanamrit ka mahatv

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चरणामृत का महत्व अक्सर जब हम मंदिर जाते है तो पंडित जी हमें भगवान का चरणामृत देते है,क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश की कि चरणामृतका क्या महत्व है, शास्त्रों में कहा गया है। श्लोक ― अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्। विष्णो: पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते ।। अर्थात भगवान विष्णु के चरण का अमृत रूपी जल समस्त पाप -व्याधियों का शमन करने वाला है तथा औषधी के समान है। जो चरणामृत पीता है उसका पुनः जन्म नहीं होता" जल तब तक जल ही रहता है जब तक भगवान के चरणों से नहीं लगता, जैसे ही भगवान के चरणों से लगा तो अमृत रूप हो गया और चरणामृत बन जाता है। चरणामृत संबंधित एक कथा। जब भगवान का वामन अवतार हुआ, और वे राजा बलि की यज्ञ शाला में दान लेने गए तब उन्होंने तीन पग में तीन लोक नाप लिए जब उन्होंने पहले पग में नीचे के लोक नाप लिए और दूसरे में ऊपर के लोक नापने लगे तो जैसे ही ब्रह्म लोक में उनका चरण गया तो ब्रह्मा जी ने अपने कमंडलु में से जल लेकर भगवान के चरण धोए और फिर चरणामृत को वापस अपने कमंडल में रख लिया,वह चरणामृत गंगा जी बन गई, जो आज भी सारी दुनिया के पापों को धोती है, ये शक्ति उनके पास कहाँ से

हिन्दू धर्म के 18 पुराण

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हिन्दू धर्म के 18 पुराण , अठारह पुराण की जानकारी नमस्कार मित्रों आज का यह लेख हिन्दू धर्म के अठारह पुराणों पर आधारित है, क्योंकि इसमें हमने आपकी सुविधा के लिए पुराणों से संबंधित विषय को चुना है । यहाँ पर आपको सभी पुराणों की PDF FILE प्राप्त हो जाएगी जिसे आप DOWNLOAD करके  पढ़ भी सकते हैं अगर आप इन पुराणों को खरीदना चाहते हैं तो आप दिए गए BUY NOW पर क्लिक करके आसानी से खरीद सकते हैं। 1 ब्रह्म पुराण –   ब्रह्म पुराण सब से प्राचीन है। इस पुराण में  10000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा की महानता के अतिरिक्त सृष्टि की उत्पत्ति, गंगा आवतरण तथा रामायण और कृष्णावतार की कथायें भी संकलित हैं। इस ग्रंथ से सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर सिन्धु घाटी सभ्यता तक की कुछ ना कुछ जानकारी प्राप्त की जा सकती है।   2 पद्म पुराण –   पद्म पुराण में 55000 श्र्लोक हैं और यह ग्रंथ पाँच खण्डों में विभाजित है जिन के नाम सृष्टिखण्ड, स्वर्गखण्ड, उत्तरखण्ड, भूमिखण्ड तथा पातालखण्ड हैं। इस ग्रंथ में पृथ्वी आकाश, तथा नक्षत्रों की उत्पति के बारे में उल्लेख किया गया है। चार प्रकार से जीवों की उत्पत्ति होती है जिन्हें